कोई दीवाना कहता है | कविता | Kumar Vishwas


कोई दीवाना कहता है 


कोई दीवाना कहता है | कविता | Kumar Vishwas

– कुमार विश्वास  

आज हम आपके साथ  मशहूर ‘कविता’  “कोई दीवाना कहता है”  साझा करने जा रहे है ! इस कविता के  लेखेक है कुमार विश्वास

हम समझते है उन्हें किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है वो कवि जगत के बहुत ही मशहूर एव लाज्फाब कवियों में से एक है

तोह आई आपका जयादा समय न लेते हुए सीधा चलते है उनकी मशहूर कविता पर   “कोई दीवाना कहता है”  


 

कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ,
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है ,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है …

 


 

मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है ,
कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !
यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं ,
जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है …

 


 

समंदर पीर का अन्दर है, लेकिन रो नही सकता ,
यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना, मगर सुन ले ,
जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता …

 


 

बदलने को तो इन आंखों के मंजर कम नहीं बदले,
तुम्हारी याद के मौसम हमारे गम नहीं बदले
तुम अगले जन्म में हमसे मिलोगी तब तो मानोगी,
जमाने और सदी की इस बदल में हम नहीं बदले…

 


कविता – kumar vishwas


बहुत टूटा बहुत बिखरा, थपेड़े सह नहीं पाया,
हवाओं के इशारों पर मगर में बह नहीं पाया !
अधूरा अनसुना ही रह गया यूं प्‍यार का किस्‍सा ,
कभी तुम सुन नहीं पाई, कभी मैं कह नहीं पाया…

 


 

भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हंगामा ,
हमारे दिल में कोई ख्‍वाब पल बैठा तो हंगामा ,
अभी तक डूब कर सुनते थे हर किस्‍सा मोहब्‍बत का !
मैं किस्‍से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा…

 


 

      मैं जब भी तेज़ चलता हूँ ,नज़ारे छूट जाते हैं ,
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो साँचे टूट जाते हैं ,
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कँधा थपथपाते हैं !
मैं हँसता हूँ तो अक़्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं…

 


 

हर एक नदिया के होंठों पे समंदर का तराना है,
यहाँ फरहाद के आगे सदा कोई बहाना है !
वही बातें पुरानी थीं, वही किस्सा पुराना है,
तुम्हारे और मेरे बीच में फिर से जमाना है…

 


 

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